महाभारत 9.32.49
मा वृथा गर्ज कौन्तेय शारदाभ्रमिवाजलम्दर्शयस्व बलं युद्धे यावत्तत्तेऽद्य विद्यते
mā vṛthā garja kaunteya śāradābhramivājalamdarśayasva balaṃ yuddhe yāvattatte'dya vidyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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