महाभारत 9.34.39
कथमाप्लुत्य तस्मिंस्तु पुनराप्यायितः शशीएतन्मे सर्वमाचक्ष्व विस्तरेण महामुने
kathamāplutya tasmiṃstu punarāpyāyitaḥ śaśīetanme sarvamācakṣva vistareṇa mahāmune
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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