महाभारत 9.34.54
रोहिण्यामेव भगवन्सदा वसति चन्द्रमाःतस्मान्नस्त्राहि सर्वा वै यथा नः सोम आविशेत्
rohiṇyāmeva bhagavansadā vasati candramāḥtasmānnastrāhi sarvā vai yathā naḥ soma āviśet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें