महाभारत 9.35.34
आज्यं च सलिलं चक्रे भागांश्च त्रिदिवौकसाम्सोमस्याभिषवं कृत्वा चकार तुमुलं ध्वनिम्
ājyaṃ ca salilaṃ cakre bhāgāṃśca tridivaukasāmsomasyābhiṣavaṃ kṛtvā cakāra tumulaṃ dhvanim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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