महाभारत 9.35.37
ततः सुतुमुलं शब्दं शुश्रावाथ बृहस्पतिःश्रुत्वा चैवाब्रवीद्देवान्सर्वान्देवपुरोहितः
tataḥ sutumulaṃ śabdaṃ śuśrāvātha bṛhaspatiḥśrutvā caivābravīddevānsarvāndevapurohitaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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