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महाभारत 9.35.49
पशुलुब्धौ युवां यस्मान्मामुत्सृज्य प्रधावितौतस्माद्रूपेण तेषां वै दंष्ट्रिणामभितश्चरौ
paśulubdhau yuvāṃ yasmānmāmutsṛjya pradhāvitautasmādrūpeṇa teṣāṃ vai daṃṣṭriṇāmabhitaścarau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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