महाभारत 9.36.38
कस्मिंश्च कारणे तत्र विस्मितो यदुनन्दनःविनिवृत्ता सरिच्छ्रेष्ठा कथमेतद्द्विजोत्तम
kasmiṃśca kāraṇe tatra vismito yadunandanaḥvinivṛttā saricchreṣṭhā kathametaddvijottama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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