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महाभारत 9.36.39
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
पूर्वं कृतयुगे राजन्नैमिषेयास्तपस्विनःवर्तमाने सुबहुले सत्रे द्वादशवार्षिकेऋषयो बहवो राजंस्तत्र संप्रतिपेदिरे
pūrvaṃ kṛtayuge rājannaimiṣeyāstapasvinaḥvartamāne subahule satre dvādaśavārṣikeṛṣayo bahavo rājaṃstatra saṃpratipedire
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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