महाभारत 9.36.42
समन्तपञ्चकं यावत्तावत्ते द्विजसत्तमाःतीर्थलोभान्नरव्याघ्र नद्यास्तीरं समाश्रिताः
samantapañcakaṃ yāvattāvatte dvijasattamāḥtīrthalobhānnaravyāghra nadyāstīraṃ samāśritāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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