महाभारत 9.37.14
एवमेषा सरिच्छ्रेष्ठा पुष्करेषु सरस्वतीपितामहार्थं संभूता तुष्ट्यर्थं च मनीषिणाम्
evameṣā saricchreṣṭhā puṣkareṣu sarasvatīpitāmahārthaṃ saṃbhūtā tuṣṭyarthaṃ ca manīṣiṇām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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