महाभारत 9.37.28
इति सप्त सरस्वत्यो नामतः परिकीर्तिताःसप्तसारस्वतं चैव तीर्थं पुण्यं तथा स्मृतम्
iti sapta sarasvatyo nāmataḥ parikīrtitāḥsaptasārasvataṃ caiva tīrthaṃ puṇyaṃ tathā smṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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