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महाभारत 9.40.31
तत्रेष्ट्वा पुरुषव्याघ्रो ययातिः पृथिवीपतिःआक्रामदूर्ध्वं मुदितो लेभे लोकांश्च पुष्कलान्
tatreṣṭvā puruṣavyāghro yayātiḥ pṛthivīpatiḥākrāmadūrdhvaṃ mudito lebhe lokāṃśca puṣkalān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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