महाभारत 9.40.3
पुरा हि नैमिषेयाणां सत्रे द्वादशवार्षिकेवृत्ते विश्वजितोऽन्ते वै पाञ्चालानृषयोऽगमन्
purā hi naimiṣeyāṇāṃ satre dvādaśavārṣikevṛtte viśvajito'nte vai pāñcālānṛṣayo'gaman
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें