महाभारत 9.41.24
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा कृपाशीलस्य सा सरित्चिन्तयामास कौरव्य किं कृतं सुकृतं भवेत्
tasya tadvacanaṃ śrutvā kṛpāśīlasya sā saritcintayāmāsa kauravya kiṃ kṛtaṃ sukṛtaṃ bhavet
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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