महाभारत 9.41.35
ततोऽपवाहितं दृष्ट्वा वसिष्ठमृषिसत्तमम्अब्रवीदथ संक्रुद्धो विश्वामित्रो ह्यमर्षणः
tato'pavāhitaṃ dṛṣṭvā vasiṣṭhamṛṣisattamamabravīdatha saṃkruddho viśvāmitro hyamarṣaṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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