महाभारत 9.41.39
एवं वसिष्ठापवाहो लोके ख्यातो जनाधिपआगच्छच्च पुनर्मार्गं स्वमेव सरितां वरा
evaṃ vasiṣṭhāpavāho loke khyāto janādhipaāgacchacca punarmārgaṃ svameva saritāṃ varā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें