महाभारत 9.43.10
स तत्र ववृधे लोकानावृत्य ज्वलनात्मजःददृशुर्ज्वलनाकारं तं गर्भमथ कृत्तिकाः
sa tatra vavṛdhe lokānāvṛtya jvalanātmajaḥdadṛśurjvalanākāraṃ taṃ garbhamatha kṛttikāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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