महाभारत 9.43.19
तथैनमन्वनृत्यन्त देवकन्याः सहस्रशःदिव्यवादित्रनृत्तज्ञाः स्तुवन्त्यश्चारुदर्शनाः
tathainamanvanṛtyanta devakanyāḥ sahasraśaḥdivyavāditranṛttajñāḥ stuvantyaścārudarśanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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