महाभारत 9.43.20
अन्वास्ते च नदी देवं गङ्गा वै सरितां वरादधार पृथिवी चैनं बिभ्रती रूपमुत्तमम्
anvāste ca nadī devaṃ gaṅgā vai saritāṃ varādadhāra pṛthivī cainaṃ bibhratī rūpamuttamam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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