महाभारत 9.43.38
एवं स कृत्वा ह्यात्मानं चतुर्धा भगवान्प्रभुःयतो रुद्रस्ततः स्कन्दो जगामाद्भुतदर्शनः
evaṃ sa kṛtvā hyātmānaṃ caturdhā bhagavānprabhuḥyato rudrastataḥ skando jagāmādbhutadarśanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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