महाभारत 9.44.48
जयं महाजयं चैव नागौ ज्वलनसूनवेप्रददौ पुरुषव्याघ्र वासुकिः पन्नगेश्वरः
jayaṃ mahājayaṃ caiva nāgau jvalanasūnavepradadau puruṣavyāghra vāsukiḥ pannageśvaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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