महाभारत 9.45.10
सुदामा बहुदामा च सुप्रभा च यशस्विनीनृत्यप्रिया च राजेन्द्र शतोलूखलमेखला
sudāmā bahudāmā ca suprabhā ca yaśasvinīnṛtyapriyā ca rājendra śatolūkhalamekhalā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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