महाभारत 9.45.19पक्षालिका मन्थनिका जरायुर्जर्जराननाख्याता दहदहा चैव तथा धमधमा नृपpakṣālikā manthanikā jarāyurjarjarānanākhyātā dahadahā caiva tathā dhamadhamā nṛpaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें