महाभारत 9.45.24
एकाक्षरा सुकुसुमा कृष्णकर्णी च भारतक्षुरकर्णी चतुष्कर्णी कर्णप्रावरणा तथा
ekākṣarā sukusumā kṛṣṇakarṇī ca bhāratakṣurakarṇī catuṣkarṇī karṇaprāvaraṇā tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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