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महाभारत 9.45.30
दीर्घनख्यो दीर्घदन्त्यो दीर्घतुण्ड्यश्च भारतसरला मधुराश्चैव यौवनस्थाः स्वलंकृताः
dīrghanakhyo dīrghadantyo dīrghatuṇḍyaśca bhāratasaralā madhurāścaiva yauvanasthāḥ svalaṃkṛtāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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