महाभारत 9.45.37
परपुष्टोपमा वाक्ये तथर्द्ध्या धनदोपमाःशक्रवीर्योपमाश्चैव दीप्त्या वह्निसमास्तथा
parapuṣṭopamā vākye tatharddhyā dhanadopamāḥśakravīryopamāścaiva dīptyā vahnisamāstathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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