महाभारत 9.46.29
निषेवितं सर्वसत्त्वैर्नाम्ना बदरपाचनम्नानर्तुकवनोपेतं सदापुष्पफलं शुभम्
niṣevitaṃ sarvasattvairnāmnā badarapācanamnānartukavanopetaṃ sadāpuṣpaphalaṃ śubham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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