महाभारत 9.46.7वासश्च ते सदा देव सागरे मकरालयेसमुद्रोऽयं तव वशे भविष्यति नदीपतिःvāsaśca te sadā deva sāgare makarālayesamudro'yaṃ tava vaśe bhaviṣyati nadīpatiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें