महाभारत 9.49.22
असितो देवलो राजंश्चिन्तयामास बुद्धिमान्दृष्टः प्रभावं तपसो जैगीषव्यस्य योगजम्
asito devalo rājaṃścintayāmāsa buddhimāndṛṣṭaḥ prabhāvaṃ tapaso jaigīṣavyasya yogajam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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