महाभारत 9.49.26
ततोऽसितः सुसंरब्धो व्यवसायी दृढव्रतःअपश्यद्वै दिवं यान्तं जैगीषव्यं स देवलः
tato'sitaḥ susaṃrabdho vyavasāyī dṛḍhavrataḥapaśyadvai divaṃ yāntaṃ jaigīṣavyaṃ sa devalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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