महाभारत 9.49.32
अग्निष्टुतेन च तथा ये यजन्ति तपोधनाःतत्स्थानमनुसंप्राप्तमन्वपश्यत देवलः
agniṣṭutena ca tathā ye yajanti tapodhanāḥtatsthānamanusaṃprāptamanvapaśyata devalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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