महाभारत 9.49.34
यजन्ते पुण्डरीकेण राजसूयेन चैव येतेषां लोकेष्वपश्यच्च जैगीषव्यं स देवलः
yajante puṇḍarīkeṇa rājasūyena caiva yeteṣāṃ lokeṣvapaśyacca jaigīṣavyaṃ sa devalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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