महाभारत 9.49.44
असितोऽपृच्छत तदा सिद्धाँल्लोकेषु सत्तमान्प्रयतः प्राञ्जलिर्भूत्वा धीरस्तान्ब्रह्मसत्रिणः
asito'pṛcchata tadā siddhām̐llokeṣu sattamānprayataḥ prāñjalirbhūtvā dhīrastānbrahmasatriṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें