महाभारत 9.49.4
देवताः पूजयन्नित्यमतिथींश्च द्विजैः सहब्रह्मचर्यरतो नित्यं सदा धर्मपरायणः
devatāḥ pūjayannityamatithīṃśca dvijaiḥ sahabrahmacaryarato nityaṃ sadā dharmaparāyaṇaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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