महाभारत 9.49.63
अथाब्रवीदृषिवरो देवान्वै नारदस्तदाजैगीषव्ये तपो नास्ति विस्मापयति योऽसितम्
athābravīdṛṣivaro devānvai nāradastadājaigīṣavye tapo nāsti vismāpayati yo'sitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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