महाभारत 9.49.8
एवं तयोर्महाराज दीर्घकालो व्यतिक्रमत्जैगीषव्यं मुनिं चैव न ददर्शाथ देवलः
evaṃ tayormahārāja dīrghakālo vyatikramatjaigīṣavyaṃ muniṃ caiva na dadarśātha devalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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