महाभारत 9.5.2
शल्यश्च चित्रसेनश्च शकुनिश्च महारथःअश्वत्थामा कृपश्चैव कृतवर्मा च सात्वतः
śalyaśca citrasenaśca śakuniśca mahārathaḥaśvatthāmā kṛpaścaiva kṛtavarmā ca sātvataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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