महाभारत 9.5.6
कृत्वा सेनाप्रणेतारं परांस्त्वं योद्धुमर्हसियेनाभिगुप्ताः संग्रामे जयेमासुहृदो वयम्
kṛtvā senāpraṇetāraṃ parāṃstvaṃ yoddhumarhasiyenābhiguptāḥ saṃgrāme jayemāsuhṛdo vayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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