महाभारत 9.51.13
तन्नारदवचः श्रुत्वा साब्रवीदृषिसंसदितपसोऽर्धं प्रयच्छामि पाणिग्राहस्य सत्तमाः
tannāradavacaḥ śrutvā sābravīdṛṣisaṃsaditapaso'rdhaṃ prayacchāmi pāṇigrāhasya sattamāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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