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महाभारत 9.52.4
ऋषय ऊचुःपुरा किल कुरुं राम कृषन्तं सततोत्थितम्अभ्येत्य शक्रस्त्रिदिवात्पर्यपृच्छत कारणम्
ṛṣaya ūcuḥpurā kila kuruṃ rāma kṛṣantaṃ satatotthitamabhyetya śakrastridivātparyapṛcchata kāraṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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