महाभारत 9.53.7
बभूव श्रीमती राजञ्शाण्डिल्यस्य महात्मनःसुता धृतव्रता साध्वी नियता ब्रह्मचारिणी
babhūva śrīmatī rājañśāṇḍilyasya mahātmanaḥsutā dhṛtavratā sādhvī niyatā brahmacāriṇī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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