महाभारत 9.54.3
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
रामसांनिध्यमासाद्य पुत्रो दुर्योधनस्तवयुद्धकामो महाबाहुः समहृष्यत वीर्यवान्
rāmasāṃnidhyamāsādya putro duryodhanastavayuddhakāmo mahābāhuḥ samahṛṣyata vīryavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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