महाभारत 9.55.14उदपानगताश्चापो व्यवर्धन्त समन्ततःअशरीरा महानादाः श्रूयन्ते स्म तदा नृपudapānagatāścāpo vyavardhanta samantataḥaśarīrā mahānādāḥ śrūyante sma tadā nṛpaइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें