महाभारत 9.55.39
किं वाचा बहुनोक्तेन कत्थितेन च दुर्मतेवाणी संपद्यतामेषा कर्मणा मा चिरं कृथाः
kiṃ vācā bahunoktena katthitena ca durmatevāṇī saṃpadyatāmeṣā karmaṇā mā ciraṃ kṛthāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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