महाभारत 9.55.40
तस्य तद्वचनं श्रुत्वा सर्व एवाभ्यपूजयन्राजानः सोमकाश्चैव ये तत्रासन्समागताः
tasya tadvacanaṃ śrutvā sarva evābhyapūjayanrājānaḥ somakāścaiva ye tatrāsansamāgatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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