महाभारत 9.56.18
गोमूत्रिकाणि चित्राणि गतप्रत्यागतानि चपरिमोक्षं प्रहाराणां वर्जनं परिधावनम्
gomūtrikāṇi citrāṇi gatapratyāgatāni caparimokṣaṃ prahārāṇāṃ varjanaṃ paridhāvanam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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