महाभारत 9.56.39
तां नामृष्यत कौरव्यो गदां प्रतिहतां रणेमत्तो द्विप इव क्रुद्धः प्रतिकुञ्जरदर्शनात्
tāṃ nāmṛṣyata kauravyo gadāṃ pratihatāṃ raṇematto dvipa iva kruddhaḥ pratikuñjaradarśanāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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