महाभारत 9.57.2
अनयोर्वीरयोर्युद्धे को ज्यायान्भवतो मतःकस्य वा को गुणो भूयानेतद्वद जनार्दन
anayorvīrayoryuddhe ko jyāyānbhavato mataḥkasya vā ko guṇo bhūyānetadvada janārdana
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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