महाभारत 9.57.34
अवक्षेपं तु तं दृष्ट्वा पुत्रस्तव विशां पतेअपासर्पत्ततः स्थानात्सा मोघा न्यपतद्भुवि
avakṣepaṃ tu taṃ dṛṣṭvā putrastava viśāṃ pateapāsarpattataḥ sthānātsā moghā nyapatadbhuvi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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