महाभारत 9.57.55
ह्रदाः कूपाश्च रुधिरमुद्वेमुर्नृपसत्तमनद्यश्च सुमहावेगाः प्रतिस्रोतोवहाभवन्
hradāḥ kūpāśca rudhiramudvemurnṛpasattamanadyaśca sumahāvegāḥ pratisrotovahābhavan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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